झारखण्ड का इतिहास: प्राचीन काल से राज्य निर्माण तक
झारखण्ड, जिसे 'वनों की भूमि' भी कहा जाता है, का एक समृद्ध और गौरवशाली इतिहास रहा है। सामान्य ज्ञान और प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से इस राज्य का ऐतिहासिक सफर अत्यंत महत्वपूर्ण है。
1. प्राचीन और मध्यकालीन इतिहास
प्राचीन काल में इस क्षेत्र को मगध साम्राज्य का हिस्सा माना जाता था। मौर्य और गुप्त काल के दौरान भी इस वनाच्छादित क्षेत्र का उल्लेख मिलता है। मध्यकाल में यहाँ चेरो, नागवंशी और सिंह राजवंशों का शासन रहा, जिन्होंने अपनी संस्कृति और भूमि की स्वतंत्रता को बनाए रखा।
2. ब्रिटिश काल और प्रमुख जनजातीय विद्रोह
अंग्रेजों के आगमन के बाद झारखण्ड के वीर जनजातीय नायकों ने अपने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए कड़ा संघर्ष किया। कुछ प्रमुख विद्रोह इस प्रकार हैं:
- तिलका मांझी विद्रोह (1784): तिलका मांझी (जबरा पहाड़िया) के नेतृत्व में पहला बड़ा विद्रोह, जिसमें उन्होंने गुरिल्ला युद्ध का सहारा लिया।
- संथाल विद्रोह / हूल (1855-56): सिद्धू-कान्हू, चांद और भैरव के नेतृत्व में अंग्रेजी हुकूमत और महाजनों के खिलाफ ऐतिहासिक जनक्रांति।
- मुंडा उलगुलान (1895-1900): धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा के नेतृत्व में हुआ यह विद्रोह ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ सबसे प्रभावशाली आंदोलनों में से एक था।
3. पृथक झारखण्ड राज्य आंदोलन और गठन
1912 में जब बिहार को बंगाल से अलग किया गया, तब यह क्षेत्र बिहार का हिस्सा बना। 1928 में साइमन कमीशन के समक्ष पहली बार पृथक राज्य की मांग रखी गई। बाद में जयपाल सिंह मुंडा ने झारखण्ड पार्टी का गठन कर इस आंदोलन को एक मजबूत राजनीतिक दिशा दी।
राज्य का गठन: दशकों के लंबे और कड़े संघर्ष के बाद, 15 नवंबर 2000 (भगवान बिरसा मुंडा की जयंती) को बिहार पुनर्गठन अधिनियम के तहत झारखण्ड भारत का 28वाँ राज्य बना।
Name: Bhadru Suren
Role: Founder & Content Creator
Education: B.A. History (FYUGP), Kolhan University
Location: Jharkhand, India
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Project: Suren Vidya
Platform: Blogger
Last update: 2026

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