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​जंतर मंतर 2.0: दिल्ली बनी छावनी, क्या देश में अघोषित इमरजेंसी लग चुकी है?

JANTAR MANTAR PROTEST
LATEST CASES & POLICE ACTION
FIRs • Detentions • October 2026

जंतर मंतर 2.0: 'वोट चोर' के खिलाफ अभूतपूर्व आंदोलन और खतरे में लोकतंत्र

नमस्कार दोस्तों! जिस प्रकार का व्यवहार कल, दिनांक 10 अक्टूबर 2026 को जंतर मंतर 2.0 (प्रोटेस्ट) के साथ हुआ, वैसा भारत देश में पहले कभी नहीं हुआ। एक शांतिपूर्ण आंदोलन को रोकने हेतु इतनी सुरक्षा की जरूरत पड़ गई, वह भी केवल एक व्यक्ति को बचाने के लिए!

कई सारे पुलिस, बीएसएफ (BSF) और सीआरपीएफ (CRPF) के जवानों को दिल्ली में तैनात (Deploy) किया गया। देश इस बात को सदा याद रखेगा कि एक प्रोटेस्ट को रोकने के लिए इतने बड़े स्तर पर अघोषित (Unauthorized) इमरजेंसी लागू कर दी गई। सरकार आधिकारिक घोषणा करने से डर रही थी, जिस कारण उन्होंने अनऑफिशियली ही इमरजेंसी घोषित कर दी। कई जगहों पर इंटरनेट सुविधाएँ बंद कर दी गईं, सीसीटीवी कैमरों से कड़ी निगरानी (Surveillance) की गई और बहुत से लोगों को हिरासत में (Detain) ले लिया गया। कइयों को तो उनके घरों में ही नजरबंद (House arrest) कर दिया गया।

देश इस बात को सदा याद रखेगा कि 'वोट चोर' और पीएम मोदी के खिलाफ यह प्रोटेस्ट एक महान क्रांति की नींव रखने वाला आंदोलन बन गया है, या कहें तो इसने अपना नाम इतिहास में दर्ज कर लिया है।

क्या हम तानाशाही (Dictatorship) की ओर बढ़ रहे हैं?

दोस्तों, आज 11 अक्टूबर 2026 है। कल जो हुआ, वह भारत देश के लिए दुखद और खुशी, दोनों की बात थी। दुखद इसलिए, क्योंकि एक व्यक्ति को बचाने के लिए केंद्र सरकार ने जो किया, वह वाकई निंदनीय है। यह सीधे तौर पर तानाशाही (Dictatorship) का इशारा करता है; बल्कि इशारा नहीं, इसे डिक्टेटरशिप ही कहना सही होगा।

यहाँ लोगों का 'फ्रीडम ऑफ स्पीच' (बोलने का अधिकार) छीना जा रहा है और आंदोलन करने से भी रोका जा रहा है। जबकि कानूनी तौर पर यह हमारी आज़ादी है कि कोई भी व्यक्ति शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर सकता है और सरकार को उसका जवाब देना पड़ता है। लेकिन यहाँ तो सरकार चुप बैठी है। अगर कुछ कर रही है, तो बस इस प्रोटेस्ट को रोकने और बर्बाद करने की कोशिश, जहाँ लोगों का बोलने का अधिकार भी खत्म होता दिख रहा है।

और खुशी की बात यह है कि एक व्यक्ति, जो इलेक्शन कमीशन (चुनाव आयोग) से आते हैं, उन्हें हटाने के लिए पूरा देश एकजुट हुआ है। यह हमारी एकजुटता का संदेश है कि संकट की घड़ी में हम सभी भारतीय एक हैं। इन नेताओं की वजह से हम भले ही कितने ही जातिवाद में क्यों न बंटे हों, लेकिन जब देश पर संकट आता है, तो हम सब सिर्फ और सिर्फ भारतीय होते हैं।

दिल्ली बनी छावनी: अघोषित इमरजेंसी का माहौल

दोस्तों, भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में इन 'वोट चोर' नेताओं और भ्रष्ट अधिकारियों के कारण ही इस आंदोलन का जन्म हुआ। इस आंदोलन को रोकने के लिए केंद्र सरकार और पीएम मोदी भी अंदर से डर चुके हैं।

दिल्ली में 45 मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया गया (सॉरी, मेट्रो और ट्रेनों को मिलाकर 45 या इससे कहीं ज्यादा ट्रेनें बंद की गई हैं)। बसों को ट्रैक किया जा रहा है, बुकिंग कैंसल कर दी गई हैं और सभी बसों को रोक दिया गया है। जंतर मंतर और उसके आसपास के इलाकों में कड़ी चेकिंग हो रही है। जंतर मंतर पर भारी संख्या में पुलिस ऑफिसर और सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं, ताकि इस प्रोटेस्ट को रोका जा सके।

ऐसा मानो सरकार ने चुपके से इमरजेंसी लगा दी हो। डर के मारे आज तक इन्होंने कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की है और इसी डर ने उन्हें बिना बताए अघोषित इमरजेंसी लगाने पर मजबूर कर दिया। वो कहते हैं ना कि 'डर सबको लगता है', तो पीएम भी तो एक इंसान ही हैं, डर उन्हें भी लगता है।

क्या देश के विकास से ज्यादा जरूरी एक आंदोलन को रोकना है?

केंद्र सरकार ने इस CJP प्रोटेस्ट को रोकने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी, मानो कोई आतंकी हमला होने वाला हो और उसकी पूर्व सूचना एकदम सटीक मिल गई हो। पुलवामा जैसे आतंकी हमलों के समय भी इतनी फोर्सेज डिप्लॉय नहीं की गई थीं और न ही इतनी सघन जांच हुई थी। किंतु केवल एक शांतिपूर्ण आंदोलन को रोकने के लिए इतनी फौज का इस्तेमाल किया जा रहा है!

इतनी फौज—पुलिस, सीआरपीएफ, बीएसएफ—शायद ही कभी एक साथ दिखी हो, जितनी आज इस प्रोटेस्ट पर तैनात है। इतनी चेकिंग और मुस्तैदी अगर देश के विकास और सुरक्षा के लिए होती, तो आज दिल्ली में जितने क्राइम होते हैं, वे होते ही नहीं।

ऐसी तानाशाही भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में कभी नहीं हुई। लोगों को उनके घरों में ही हाउस अरेस्ट कर लिया गया। कई लोग जिन होटलों में ठहरे हुए थे, पुलिस ने वहाँ जाकर उन्हें डिटेन कर लिया या उन्हें होटल से बाहर आने की इजाज़त नहीं दी। सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश या उत्तर प्रदेश, जहाँ से भी लोग जंतर मंतर पहुँचने की कोशिश कर रहे थे, उन्हें रोका जा रहा है। लोगों को ट्रेनों के अंदर से ही गिरफ्तार किया जा रहा है।

दिल्ली में नेटवर्क नहीं, फौज की भरमार—आखिर मोदी सरकार क्या-क्या करेगी?
अभिजीत दीप जी का ही उदाहरण लें, जिन्हें प्लेन से उतरने तक नहीं दिया गया। प्लेन जैसे ही रनवे पर उतरा, पुलिस ने अंदर घुसकर उन्हें डिटेन कर लिया। उन्हें बाहर भी नहीं आने दिया गया और गिरफ्तार करके किसी अज्ञात जगह पर ले जाया गया।

इलेक्शन कमीशन को बचाने की इतनी जद्दोजहद क्यों?

यदि बात केवल इलेक्शन कमीशन के एक अधिकारी की होती, तो सरकार उन्हें हटा देती। पर नहीं, इसमें केंद्र सरकार का भी हाथ होगा जो पिछले कई सालों से सत्ता में है। क्योंकि इलेक्शन कमीशन खुद तो ये वोट चोरी कर नहीं सकता; वह चोरी करेगा तो फायदा किसको देगा?

इसमें मोदी सरकार का क्या रोल है, इसकी महामहिम (राष्ट्रपति) द्वारा निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। इसकी तह तक जाना चाहिए और जो भी दोषी पाए जाते हैं, उन्हें जेल होनी चाहिए। मुझे लगता है कि दाल में कुछ काला ज़रूर है, तभी केंद्र सरकार एक चुनाव आयुक्त को बचाने की इतनी कोशिश कर रही है। अकेले एक इलेक्शन कमिश्नर की इतनी औकात या ताकत नहीं है कि वह अपने बचाव में इतना बड़ा सिस्टम खड़ा कर सके।

केंद्र सरकार ने तो यह नया कानून ही बना दिया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को आसानी से गिरफ्तार नहीं किया जा सकता या उन पर FIR दर्ज नहीं हो सकती। पर आखिर वह इलेक्शन कमिश्नर है कौन? जब देश में एक केंद्रीय मंत्री या बड़े पदों पर बैठे लोगों पर FIR हो सकती है, तो इन पर केस या गिरफ्तारी क्यों नहीं हो सकती? क्या वे कोई अलग दुनिया के महारथी हैं?

विपक्ष के नेता राहुल गांधी जी ने पहले ही कहा था कि 'वोट चोरी' हो रहे हैं, पर तब किसी ने उनकी बातों को सीरियसली नहीं लिया। वह सच अब सामने आ रहा है कि वे बिल्कुल सच कह रहे थे। वोट के मामले में बड़े घोटाले हो रहे थे। वो कहते हैं ना, सच्चाई छुपती नहीं और चोर कभी ना कभी पकड़ा ही जाता है।

अंधभक्ति से मोहभंग: मेरा व्यक्तिगत अनुभव

मैं भद्रू, एक समय में मोदी सरकार का बड़ा समर्थक था। जब वे नए-नए सत्ता में आए थे, तब मैं छोटा था। उस समय हमारे क्लास टीचर (जो इकोनॉमिक्स पढ़ाते थे) ने हमसे पूछा था कि "कौन बेस्ट प्रधानमंत्री है और किसे प्रधानमंत्री होना चाहिए?"

क्लास में हम सभी छात्रों ने 'मोदी जी' का नाम लिया था। इस पर सर ने कहा था-

"ठीक है, तुम लोग मानते हो तो सही बात है, पर देश के प्रधानमंत्री को अर्थव्यवस्था (Economics) पर बात करनी चाहिए और आम जनता की समस्याओं को देखना चाहिए। किसी भी प्रधानमंत्री को देश के हित में बोलना चाहिए, न कि धर्म और जाति के नाम पर देश को बांटने की राजनीति करनी चाहिए।"

मोदी जी ऐसा नहीं कर रहे हैं, इसलिए मुझे लगता है कि वे हमारे देश के प्रधानमंत्री पद के योग्य नहीं हैं। उस समय तो हमने अपने टीचर की बात को इग्नोर कर दिया था, पर आज समझ आ रहा है कि वे एकदम सटीक बात कह रहे थे। मैं भी पहले बीजेपी का कट्टर भक्त था, पर जैसे-जैसे समय बीता, मुझे एहसास होने लगा कि हमारे प्रधानमंत्री जी लगातार ऐसे काम और बयान दे रहे हैं जिन्हें डिफेंड करना मुश्किल है। उन्होंने कहा था कि 'पकौड़ा बेचना भी रोज़गार है'। ये सब देखकर मुझे लगने लगा कि देश की ज़िम्मेदारी इनके हाथों में सुरक्षित नहीं है।

हिंदू राष्ट्र नहीं, मुझे 'अखंड भारत' और 'रामराज्य' चाहिए

आज के समय में, मैं सिर्फ भारत से प्रेम करता हूँ। मैं कोई मोदी भक्त, बीजेपी भक्त या कांग्रेस भक्त नहीं हूँ; मैं सिर्फ एक देशभक्त हूँ। मेरे जैसे कई युवा जो पहले जाति और धर्म के विवादों में उलझे हुए थे, वे सब आज जंतर मंतर पर एक साथ खड़े हैं।

मोदी सरकार जो 'हिंदू राष्ट्र' बनाने की बात करती है, मैं उसका विरोध करता हूँ। हमें हिंदू राष्ट्र नहीं, बल्कि 'अखंड भारत' चाहिए, जहाँ सभी धर्मों और वर्गों के लोग एक साथ मिलकर रहें। मैं 'रामराज्य' से सहमत हूँ। रामराज्य वह है जहाँ हर इंसान को बोलने का अधिकार हो और न्याय मिले। लेकिन वर्तमान भारत में तो 'फ्रीडम ऑफ स्पीच' को ही पूरी तरह से खत्म किया जा रहा है।

हाल ही में राहुल गांधी जी ने कहा है कि वे राष्ट्रपति से मिले हैं और उन्होंने सबूत सौंपने की बात कही है। यदि राष्ट्रपति महोदया द्वारा निष्पक्ष जांच होती है, तो शायद इलेक्शन कमीशन के चीफ को इस्तीफा देना पड़ सकता है। और यदि इसमें कोई और भी दोषी पाया जाता है, तो उन पर भी गाज गिर सकती है।

मैंने एक बात गौर की है: कांग्रेस के समय में एक 'चायवाला' पीएम बना। और अब शायद वही चायवाला हमसे कह रहा है कि "तुम पकौड़ा बेचो, चाय मैं बेचूँगा!" यही है उनका रोज़गार मॉडल। (यह मैं नहीं कह रहा, बल्कि हमारे प्रधानमंत्री जी ने खुद कहा था)।

😜😁 एक छोटी सी चेतावनी (Warning)

यदि आप अपने बच्चों और परिवार से प्रेम करते हैं, तो अपनी राय अपने तक ही सीमित रखें। केंद्र सरकार के खिलाफ कुछ ना बोलें। वे गलत कर रहे हैं, तो भी चुप रहें, तभी आप आराम से जी सकते हैं। क्योंकि यदि आप सरकार के कामों में दखल देंगे या सवाल उठाएंगे, तो या तो आप हाउस अरेस्ट हो जाएंगे या आपको डिटेन कर लिया जाएगा। अब यह आप पर निर्भर करता है कि आप क्या चुनते हैं, क्योंकि यहाँ 'फ्रीडम ऑफ स्पीच' की हत्या हो चुकी है! 😁😁😁

रुपये की गिरती कीमत और युवाओं के सवाल

मोदी जी, विपक्ष में रहते हुए आपने ही पूछा था— "क्या कारण है मित्रों कि देश का रुपया गिर रहा है?"

आज जब रुपया ऐतिहासिक निचले स्तर पर गिर चुका है और आप सत्ता में हैं, तो फिर आप कुछ क्यों नहीं कर रहे? आज हम युवा आपसे पूछते हैं—क्या कारण है कि रुपया इतना गिर चुका है? जो देश इकॉनमी में चौथे नंबर पर था, वह आज छठे नंबर पर क्यों आ चुका है?

😁😜 क्या कारण है मित्रों कि रुपया इतना गिर रहा है?

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